➤ लगातार दो बार आरक्षित रही पंचायत सीट अब होगी अनारक्षित
➤ 31 मार्च से पहले सभी जिलों को नया रोस्टर करना होगा जारी
➤ नए नियमों का असर 3700 से ज्यादा पंचायत चुनावों पर पड़ेगा
हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों से पहले सरकार ने आरक्षण रोस्टर नियमों में बड़ा बदलाव किया है। पंचायती राज विभाग ने संशोधित नियमों की अधिसूचना जारी कर दी है, जिसके तहत अब जो पंचायतें या पद लगातार दो बार एक ही श्रेणी के लिए आरक्षित रहे हैं, उन्हें इस बार ओपन (अनारक्षित) किया जाएगा।
इस संशोधन के साथ ही हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (चुनाव) संशोधन नियम, 2026 लागू हो गए हैं। इनका सीधा असर प्रदेश की 3700 से अधिक पंचायतों में होने वाले चुनावों पर पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार पंचायत चुनाव 31 मई से पहले करवाए जाने हैं, जिसके चलते सभी जिलों के डीसी को 31 मार्च से पहले नया आरक्षण रोस्टर जारी करना होगा।
पहले कई जिलों में प्रशासन ने पुराने नियमों के अनुसार रोस्टर तैयार कर लिया था, लेकिन कैबिनेट के फैसले के बाद अब नए नियमों के तहत रोस्टर दोबारा तैयार करना पड़ेगा। इससे प्रशासनिक स्तर पर काम तेज हो गया है।
पंचायत चुनाव में कुल पांच पद होते हैं—प्रधान, उप प्रधान, वार्ड सदस्य, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य। इनमें से उप प्रधान पद पर आरक्षण लागू नहीं होता, जबकि बाकी चार पदों पर रोस्टर लागू किया जाता है।
नए नियम के अनुसार, यदि इन चार पदों में से कोई भी पद लगातार दो कार्यकाल तक एक ही आरक्षित वर्ग के पास रहा है, तो इस बार वह सीट अनारक्षित होगी। इसका उद्देश्य एक ही वर्ग को बार-बार आरक्षण मिलने की व्यवस्था को रोकना है।
हालांकि सरकार ने एक महत्वपूर्ण शर्त भी जोड़ी है—यदि किसी वर्ग के लिए तय आरक्षण प्रतिशत पूरा नहीं होता, तो उस स्थिति में यह नियम लागू नहीं होगा और आरक्षण जारी रखा जा सकेगा। इससे आरक्षण संतुलन बनाए रखने की कोशिश की गई है।
यह नियम पहले 13 मार्च 2026 को ड्राफ्ट के रूप में जारी किया गया था। तय समय सीमा में कोई आपत्ति या सुझाव नहीं मिलने के बाद अब इसे अंतिम रूप दे दिया गया है।
सरकार का कहना है कि इस बदलाव से पंचायत स्तर पर पारदर्शिता, संतुलन और समान अवसर सुनिश्चित होंगे। माना जा रहा है कि इस फैसले से कई पंचायतों में चुनावी समीकरण बदल सकते हैं।



